{12th Physics}मुक्त इलेक्ट्रॉनों का अनुगमन वेग

मुक्त इलेक्ट्रॉनों के अनुगमन वेग अनुगमन वेग (अपवाह वेग)- किसी धातु के तार के सिरों को बैटरी से जोड़ देने पर तार के सिरों के बीच एक विभवान्तर स्थापित हो जाता है। इस विभवान्तर अथवा वैद्युत-क्षेत्र के कारण इलेक्ट्रॉन एक वैद्युत बल का अनुभव करते हैं जो इलेक्ट्रॉनों को त्वरण प्रदान करता है। परन्तु इस त्वरण से इलेक्ट्रॉनों की चाल लगातार बढ़ती नहीं जाती, बल्कि धातु के धन आयनों से टकराकर ये इलेक्ट्रॉन बैटरी से प्राप्त ऊर्जा (UPBoardSolutions.com) को खोते रहते हैं। स्पष्ट है कि बैटरी का विभवान्तर इलेक्ट्रॉनों को त्वरित…

{12th Physics}सेल के विद्युत वाहक बल

सेल का विद्युत वाहक बल- एकांक आवेश को पूरे परिपथ (सेल सहित) में प्रवाहित करने में सेल द्वारा दी गयी ऊर्जा को सेल का ‘विद्युत वाहक बल’ (electromotive force) कहते हैं। यदि किसी परिपथ में q आवेश प्रवाहित करने पर सेल को W कार्य करना पड़े (ऊर्जा देनी पड़े) तो सेल का वि० वा० बल  यदि W जूल में तथा q कूलॉम में हों तो E का मान वोल्ट  में प्राप्त होता है। यदि किसी परिपथ में 1 कूलॉम आवेश प्रवाहित करने पर सेल द्वारा दी गयी ऊर्जा 1 जूल…

{12th Physics}ओम का नियम Ohm’s law in hindi |Rtstudy

ओम का नियम Ohm’s law in hindi जर्मनी के महान वैज्ञानिक डॉ जॉर्ज साइमन ओम ने 1826 में एक नियम दिया , यह नियम किसी चालक के सिरों पर आरोपित विभवांतर तथा उस चालक में प्रवाहित धारा में संबंध स्थापित करता है इस नियम को ओम का नियम कहते है। ओम के नियम के अनुसार ” यदि चालक की भौतिक अवस्थाएं जैसे लम्बाई , क्षेत्रफल ,आयतन , ताप दाब इत्यादि अपरिवर्तित रहे तो चालक के सिरों पर आरोपित विभवांतर तथा इसमें बहने वाली धारा का अनुपात नियत रहता है। ” ओम ने…

सेल के विद्युत वाहक बल एवं टर्मिनल विभवान्तर में अन्तर

सेल के विद्युत वाहक बल एवं टर्मिनल विभवान्तर में अन्तर एकांक आवेश को पूरे परिपथ में सेल सहित प्रवाहित करने में सेल द्वारा दी गयी ऊर्जा को सेल का ‘विद्युत वाहक बल’ कहते हैं, जबकि किसी परिपथ  के दो बिन्दुओं के बीच एकांक आवेश को प्रवाहित करने में किए गए कार्य को उन बिन्दुओं के बीच ‘टर्मिनल विभवान्तर’ कहते हैं। 12th physics notes in hindi , 12th notes in hindi, 12th hindi notes in pdf, 12th notes

{12th Physics}सेल का आन्तरिक प्रतिरोध किन-किन बातों पर निर्भर करता है?

सेल का आन्तरिक प्रतिरोध निम्नलिखित बातों पर निर्भर करता है- सेल के इलेक्ट्रोडों के बीच की दूरी पर- यह दूरी के अनुक्रमानुपाती होता है। वैद्युत-अपघट्य के घोल में इलेक्ट्रोडों के डूबे हुए भागों के क्षेत्रफल पर- यह क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है। वैद्युत-अपघट्य की प्रकृति तथा सान्द्रता पर- विभिन्न वैद्युत-अपघट्यों के लिए आन्तरिक प्रतिरोध भिन्न होता है तथा यह वैद्युत अपघट्य के घोल की सान्द्रता के भी अनुक्रमानुपाती होता है।

Current Affairs 14 April 2020 In Hindi+English Gk Question

Current Affairs 14 April 2020 In Hindi+English Gk Question

Current Affairs 14 April 2020 In Hindi+English Gk Question With PDF- 14 April कर्रेंट अफेयर्स हिंदी मे प्रकाशित किए गए सभी Current Affairs प्रश्नोत्तरी आने वाली SSC, UPSC, Bank, Railway, Clerk, PO परीक्षाओं के लिए सहायक होंगे Current Affairs Gk Questions 1- हाल ही में RBI ने किस बैंक के MD & CEO महाबलेश्‍वर M.S. को दोबारा नियुक्‍त किया है ? Recently, RBI appointed MD & CEO Mahabaleshwar M.S. of which bank ? Ans — Karnataka Bank / कर्नाटक बैंक 2- हाल ही मेें प्रसार भारती ने किस नाम से…

{12th Biology}लैमार्क के मूल आधार क्या थे

लैमार्क के मूल आधार क्या थे लैमार्क के मूल आधार निम्नलिखित हैं – जीव के आन्तरिक बल में जीवों के आकार को बढ़ाने की प्रवृत्ति होती है जिसका अर्थ यह है कि जीवों के पूरे शरीर तथा उनके विभिन्न अंगों में बढ़ने की प्रवृत्ति होती है। जीवों की लगातार नयी जरूरतों के अनुसार नये अंगों तथा शरीर के दूसरे भागों का विकास होता है। किसी अंग का विकास तथा उसके कार्य करने की क्षमता उसके उपयोग तथा अनुपयोग पर निर्भर करती है। लगातार उपयोग से अंग धीरे-धीरे मजबूत हो जाते…

{12th Biology}उत्परिवर्तन पर संक्षिप्त टिप्पणी

उत्परिवर्तन पर संक्षिप्त टिप्पणी उत्परिवर्तन ह्यूगो डी ब्रीज (Hugo de Vries, 1848 – 1935), हॉलैण्ड के एक प्रसिद्ध वनस्पतिशास्त्री ने सांध्य प्रिमरोज (evening primrose) अर्थात् ऑइनोथेरा लैमार्किआना (Oenothera lamarckigna) नामक पौधे की दो स्पष्ट किस्में देखीं, जिनमें तने की लम्बाई, पत्तियों की आकृति, पुष्पों की आकृति एवं रंग में स्पष्ट भिन्नताएँ थीं। इन्होंने यह भी देखा कि अन्य पीढ़ियों में कुछ अन्य प्रकार की वंशागत विभिन्नताएँ भी उत्पन्न हुईं। डी ब्रीज ने इस पौधे की शुद्ध नस्ल की इस प्रकार की सात जातियाँ प्राप्त कीं। उन्होंने इन्हें प्राथमिक जातियाँ (primary species)…

{12th Biology}जैव विकास के पक्ष में जीवाश्म विज्ञान के प्रमाण पर टिप्पणी

जैव विकास के पक्ष में जीवाश्म विज्ञान के प्रमाण पर टिप्पणी जैव विकास के जीवाश्म विज्ञान से प्रमाण (Gr. Palaeos = ancient, onta – existing things and logous = science) जीवाश्म (fossil) का अध्ययन जीवाश्म विज्ञान (Palaeontology) कहलाता है। जीवाश्म का अर्थ उन जीवों के बचे हुए अंश से है जो अब से पहले लाखों-करोड़ों वर्षों पूर्व जीवित रहे होंगे। जीवाश्म लैटिन शब्द फॉसिलिस (fossilis) से बना है जिसका मतलब है खोदना (dug up)। यह जीव विज्ञान की एक महत्त्वपूर्ण शाखा है जो जीव विज्ञान (Biology) और भूविज्ञान (Geology) को जोड़ती है। जीवाश्म का बनना 1. अश्मीभूत…

{12th Biology}नवडार्विनवाद पर एक टिप्पणी

नवडार्विनवाद पर एक टिप्पणी नवडार्विनवाद/जैव विकास का आधुनिक संश्लेषणात्मक सिद्धांत वर्ष 1930 तथा 1945 के मध्य आधुनिक खोजों के आधार पर डार्विनवाद में कुछ परिवर्तन सम्मिलित किये गये तथा प्राकृतिक चयनवाद को पुनः मान्यता प्राप्त कराने वालों में वीजमान (Weismann), हैल्डेन (Haldane), जूलियन हक्सले (Julian Huxley), गोल्डस्मिट (Goldschmidt) तथा डॉबजैन्स्की (Dobzhansky) आदि हैं। डॉडसन (Dodson) के अनुसार, जैव विकास का आधुनिक संश्लेषित मत (moderm synthetic theory of evolution) ही वास्तव में नवडार्विनवाद है। नवडार्विनवाद के अनुसार नयी जातियों की उत्पत्ति निम्नांकित पदों के आधार पर होती है – विभिन्नताएँ (Variations) –…