{12th Biology}मानव भ्रूण का रोपण पर टिप्‍पणी (Full Details)

{12th Biology}मानव भ्रूण का रोपण पर टिप्‍पणी (Full Details)

मानव भ्रूण का रोपण
निषेचन के लगभग एक घण्टे के बाद युग्मनज (zygote) का विदलन शुरू हो जाता है और चौथे दिन तक चार बार मिटॉटिक विभाजनों द्वारा विभाजित होकर 16 कोरकखण्डों (blastomeres) की एक गोल ठोस संरचना बनती है, यह संरचना मॉरुला (morula) कहलाती है। इसका निर्माण होते-होते यह गर्भाशय में पहुँच जाता है।

मॉरुला के गर्भाशय में जाने के बाद गर्भाशय गुहा का ग्लाइकोजनयुक्त पोषक तरल मॉरुला (भ्रूण) में भीतर जाने लगता है, जिससे मॉरुला के अन्दर पोषक तरल से भरी हुई एक गुहा-सी बन जाती है। इस गुहा को ब्लास्टोसील (blastocoel) कहते हैं। भ्रूण की इस प्रावस्था को ब्लास्टोसिस्ट (blastocyst) कहते हैं। इसके बनते-बनते भ्रूण का पारभासी आवरण समाप्त हो जाता है। गुहा की दीवार की कोशिकाएँ चपटी हो जाती हैं। इन्हें अब ट्रोफोब्लास्ट (trophoblast) कहते हैं। ट्रोफोब्लास्ट गर्भाशय से पोषक रसों का अवशोषण करती है। ट्रोफोब्लास्ट आँवल (placenta) के निर्माण में भी भाग लेती हैं। ब्लास्टुला की भीतरी कोशिका पिण्ड को भ्रूणबीज (embryoblast) कहते हैं, क्योंकि इसी से भावी भ्रूण के विभिन्न भाग बनते हैं।

निषेचन के एक सप्ताह बाद ब्लास्टोसिस्ट गर्भाशय के ऊपरी भाग में इसकी भित्ति से चिपक जाता है। अर्थात् ब्लास्टोसिस्ट का गर्भाशय भित्ति में रोपण प्रारम्भ हो जाता है। ट्रोफोब्लास्ट की बाह्य सतह से कुछ अंगुली सदृश प्रवर्ध निकलकर गर्भाशय भित्ति के अन्तः स्तर में घुसकर निषेचन के लगभग 8 दिन बाद भ्रूण को गर्भाशयी भित्ति से जोड़ देते हैं, यही क्रिया भ्रूण का रोपण (implantation of embryo) है।

 

 

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