{12th Biology}भ्रूणपोष क्‍या है व इसके प्रकार {Full Detail}

भ्रूणपोष तथा उसके प्रकार

सभी पुष्पीय पौधों में भ्रूण (embryo) के पोषण के लिए एक विशेष ऊतक होता है, इसे भ्रूणपोष कहते हैं। जिम्नोस्पर्स में यह ऊतक युग्मकोभिदी या अगुणित (haploid = n) होता है किन्तु आवृतबीजी पौधों (angiospermic plants) में यह त्रिसंयोजन (triple fusion) के फलस्वरूप बनता है और अधिकतर पौधों में त्रिगुणित (triploid = 3n) होता है। इसके बीज में बने रहने तथा बीजांकुरण में सहायता करने पर बीज भ्रूणपोषी (endospermic) कहलाता है। अनेक द्विबीजपत्री पौधों के बीजों में इसका भोजन बीज के बनते समय बीजपत्रों द्वारा सोख लिया जाता है और यह बीज अभ्रूणपोषी (non- endospermic) कहलाता है।
भ्रूणकोष (embryo sac) में होने वाले त्रिसंयोजन (triple fusion) के फलस्वरूप त्रिगुणित केन्द्रक (3n = triploid nucleus) बनता है। इसी के परिवर्द्धन से एक पोषक संरचना, भ्रूणपोष (endosperm) का निर्माण होता है। यह बढ़ते हुए भ्रूण (embryo) को पोषण देता है। कभी-कभी यह ऊतक; जैसे – अंकुरण के समय भ्रूण को पोषण प्रदान करने का कार्य करता है। आवृतबीजी पौधों में परिवर्धन (development) के आधार पर भ्रूणपोष अग्रलिखित तीन प्रकार के होते हैं –

1. केन्द्रकीय भ्रूणपोष (Nuclear Endosperm)-इस प्रकार के भ्रूणपोष विकास में भ्रूणपोष केन्द्रक (endosperm nucleus) बार-बार विभाजन द्वारा स्वतन्त्र रूप से बहुत-से केन्द्रक बनाता है (भित्ति-निर्माण नहीं होता) जो बाद में परिधि पर विन्यसित हो जाते हैं। भ्रूणपोष के मध्य में एक केन्द्रीय रिक्तिका (central vacuole) बन जाती है। बाद में यह रिक्तिका समाप्त हो जाती है और बहुत-से केन्द्रक व कोशीद्रव्य इसमें भर जाते हैं। बाद में इनमें अनेक कोशाएँ बन जाती हैं। इस प्रकार का भ्रूणपोष
प्रायः पोलीपेटेली (polypetalae) वर्ग में पाया जाता है, जैसे-कैप्सेला | (Capsella)।

2. कोशिकीय भ्रूणपोष (Cellular Endosperm) – इस प्रकार के भ्रूणपोष निर्माण में भ्रूणपोष केन्द्रक के प्रत्येक विभाजन के पश्चात् कोशा-भित्ति का निर्माण होता है। इस प्रकार का भ्रूणपोष प्रायः गैमोपेटेली वर्ग में पाया जाता है, haustorium जैसे – विल्लारसिया (Villarsia)।

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3. हिलोबियल भ्रूणपोष (Helobial Endosperm) – इस प्रकार का भ्रूणपोष लगभग 19% आवृतबीजी पौधों में पाया जाता है, विशेष रूप से यह एकबीजपत्री पौधों में पाया जाता है। यह ऊपर वर्णन किये गये दोनों प्रकार के भ्रूणपोषों के बीच की अवस्था है। इसमें भ्रूणपोष केन्द्रक के प्रथम विभाजन के बाद कोशा-भित्ति का निर्माण होता है। बाद में इन दोनों भागों में केन्द्रक विभाजन होता रहता है और भित्ति-निर्माण नहीं होता, जैसे-ऐरीमुरस (Eremurus)।

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