{12th Biology}पर-परागण से होने वाले लाभ तथा हानि

पर-परागण से लाभ (Advantages of Cross-pollination)-पर-परागण से निम्नलिखित लाभ हैं –

  1. पर-परागित पुष्पों से बनने वाले फल बड़े, भारी एवं स्वादिष्ट होते हैं तथा इनमें बीजों की संख्या अधिक होती है।
  2. पर-परागण से उत्पन्न बीज भी बड़े, भारी, स्वस्थ एवं अच्छी नस्ल वाले होते हैं, जिससे उपज बढ़ जाती है।
  3. इन बीजों से उत्पन्न पौधे भी बड़े, भारी, स्वस्थ एवं सक्षम होते हैं तथा इनमें प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने की अधिक क्षमता होती है।
  4. पर-परागण द्वारा रोग अवरोधक (disease resistant) नयी जातियाँ तैयार की जा सकती हैं।
  5. पर-परागण से आनुवंशिक पुनर्योजन द्वारा विभिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं।
  6. पर-परागण द्वारा प्रकृति में स्वत: ही पौधों की नई जातियाँ (new varieties) उत्पन्न होती रहती हैं। जिनमें नये गुणों का समावेश होता है तथा हाइब्रिड विगर (hybrid vigour) के कारण अच्छी संतति बनती है।

पर-परागण से हानियाँ (Disadvantages of Cross-pollination) – अनेक लाभ होते हुए भी पर-परागण से निम्नलिखित हानियाँ भी हैं –

  1. पर-परागण की क्रिया अनिश्चित (uncertain) होती है, क्योंकि परागण के लिए यह वायु, जल एवं जन्तु पर निर्भर होती है।
  2. परागित करने वाले साधनों की समय पर उपलब्धता न होने पर अधिकांश पुष्प परागित होने से रह जाते हैं।
  3. पर-परागण के लिए पुष्पों को दूसरे पुष्पों पर निर्भर रहना पड़ता है।
  4. कीटों को आकर्षित करने के लिये पुष्पों को चटकीले रंग, बड़े दल, सुगन्ध तथा मकरन्द उत्पन्न करना पड़ता है जिन सबमें अधिक पदार्थ का अपव्यय होता है तथा अधिक ऊर्जा का ह्रास होता है।
  5. पर-परागित पुष्पों, विशेषकर वायु परागित पुष्पों में परागकण अधिक संख्या में नष्ट होते हैं।
  6. पर-परागित बीज सदैव संकर (hybrid) होते हैं।

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