{12th Biology}जैव विकास के पक्ष में जीवाश्म विज्ञान के प्रमाण पर टिप्पणी

जैव विकास के पक्ष में जीवाश्म विज्ञान के प्रमाण पर टिप्पणी

जैव विकास के जीवाश्म विज्ञान से प्रमाण
(Gr. Palaeos = ancient, onta – existing things and logous = science) जीवाश्म (fossil) का अध्ययन जीवाश्म विज्ञान (Palaeontology) कहलाता है। जीवाश्म का अर्थ उन जीवों के बचे हुए अंश से है जो अब से पहले लाखों-करोड़ों वर्षों पूर्व जीवित रहे होंगे। जीवाश्म लैटिन शब्द फॉसिलिस (fossilis) से बना है जिसका मतलब है खोदना (dug up)। यह जीव विज्ञान की एक महत्त्वपूर्ण शाखा है जो जीव विज्ञान (Biology) और भूविज्ञान (Geology) को जोड़ती है।

जीवाश्म का बनना
1. अश्मीभूत जीवाश्म (Petrified Fossils) – जीवाश्म मुख्यत: अवसादी शैल (sedimentary rocks) में पाये जाते हैं जो समुद्र या झीलों के तल पर रेत के जमा हो जाने से बनते हैं। मरे हुए जीवों का पूरा शरीर रेत से ढक जाता है तथा धीरे-धीरे यह ठोस पत्थर में परिवर्तित हो जाता है। इसी प्रकार मृत जीवों के विभिन्न भागों का एक स्पष्ट अक्स (चित्र) पत्थर पर बन जाता है इस क्रिया को अश्मीभवन (petrifaction) कहते हैं तथा इस प्रकार बने जीवाश्मों को अश्मीभूत जीवाश्म (perified fossils) कहते हैं।

2. साँचा जीवाश्म (Mould Fossils) – उन जीवाश्मों में जिनमें शरीर का कोई भाग शेष नहीं | रहता केवल शरीर का साँचा मात्र रह जाता है, इसे साँचा जीवाश्म (mould fossils) कहते हैं।

3. अपरिवर्तित जीवाश्म (Unaltered Fossils) – जब जीवधारी का पूरा शरीर बर्फ में भली प्रकार से सुरक्षित रहकर सम्पूर्ण जीवाश्म बनाता है तब इन्हें अपरिवर्तित जीवाश्म (unaltered fossils) कहते हैं।

4. ठप्पा जीवाश्म (Print Fossils) – कभी-कभी मरने के बाद सड़ने से पहले जीव चट्टानों पर अपना ठप्पा बना जाते हैं, ऐसे जीवाश्म को ठप्पा जीवाश्म (print fossils) कहते हैं।

जीवाश्म का महत्त्व
जीवाश्म के अध्ययन से जीवों की उपस्थिति का पता चलता है। जीवाश्म यह भी दर्शाते हैं कि विभिन्न पौधों एवं जन्तुओं में जैविक विकास किस तरह हुआ। निम्न तथ्यों से इसका पता चलता है –

  1. विभिन्न भूवैज्ञानिक स्तरों से प्राप्त जीवाश्म विभिन्न वंशों के होते हैं।
  2. सबसे नीचे पाये जाने वाले भूवैज्ञानिक स्तरों में सबसे सरल जीव होते थे, उससे ऊपर पाये जाने वाले स्तरों में क्रमशः जटिल जीवों के जीवाश्म पाये जाते हैं। इससे पता चलता है कि जन्तुओं का विकास निम्न प्रकार से हुआ –
    एककोशिकीय प्रोटोजोआ → बहुकोशिकीय जन्तु → अकशेरुक जन्तु → कशेरुक जन्तु।
  3. विभिन्न स्तरों से प्राप्त जीवाश्मों से पता चलता है कि विभिन्न वर्गों के जीवों के बीच की संयोजी कड़ी भी थी जो जैव विकास की जटिल गुत्थी को सुलझाने में सहायक है।
  4. जीवाश्मों के अध्ययन से किसी एक जन्तु की वंशावली (pedigree) का क्रम पता चलता है।
  5. जीवाश्मों के आधार पर भूवैज्ञानिकों ने भूवैज्ञानिक समय सारणी बनायी जिसके आधार पर यह कह सकते हैं कि पौधों में पुष्पधारी पौधे (angiosperms) तथा जन्तुओं में स्तनधारी (mammals) सबसे आधुनिक एवं विकसित हैं।

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