मनुष्य में लिंग सहलग्न वंशागति का उदाहरण सहित विस्तृत वर्णन

मनुष्य में लिंग सहलग्न वंशागति का उदाहरण सहित विस्तृत वर्णन

लिंग सहलग्न लक्षण तथा इनकी वंशागति
प्राय: लिंग गुणसूत्रों पर लक्षणों के जो जीन्स होते हैं उनका सम्बन्ध लैंगिक गुणों (sexual characters) से होता है। ये जीन्स ही जन्तु में लैंगिक द्विरूपता (sexual dimorphism) के लिए जिम्मेदार (responsible) होते हैं, फिर भी जन्तुओं का यह गुण अत्यन्त जटिल तथा व्यापक होता है। और इसे निर्मित करने के लिए अनेक ऑटोसोमल जीन्स (autosomal genes) भी प्रभावी होते हैं। दूसरी ओर लिंग गुणसूत्रों पर कुछ जीन्स लैंगिक लक्षणों के अतिरिक्त अन्य लक्षणों वाले अर्थात् कायिक या दैहिक (somatic) लक्षणों वाले भी होते हैं। ये लिंग सहलग्न जीन्स (sex linked genes) कहलाते हैं, जो लिंग सहलग्न लक्षण (sex linked characters) उत्पन्न करते हैं। इनकी वंशागति लिंग सहलग्न वंशागति (sex linked inheritance) अथवा लिंग सहलग्नता (sex linkage) कहलाती है। मनुष्य में इस प्रकार के लगभग 120 लक्षणों की वंशागति पायी गयी है।

मनुष्य में लिंग निर्धारित करने वाले गुणसूत्र X तथा Y गुणसूत्र कहलाते हैं। यद्यपि इनकी संरचना में भिन्नता दिखायी देती है, फिर भी वर्तमान जानकारी के अनुसार इन गुणसूत्रों में कुछ भाग समजात (homologous) होता है जो अर्द्धसूत्री विभाजन के समय सूत्रयुग्मन (synapsis) करते हैं, अन्यथा शेष भाग असमजात (non-homologous) होता है। उपर्युक्त आधार पर लिंग सहलग्न लक्षण तीन प्रकार के हो सकते हैं –

1. X-सहलग्न लक्षण (X-Linked Characters) – x-गुणसूत्रों के असमजात खण्डों पर इनके लक्षणों के जीन्स स्थित होते हैं। Y-गुणसूत्र पर इनका युग्म विकल्पी (allele) नहीं होता है। वंशागति में ये लक्षण पुत्रों को केवल माता से तथा पुत्रियों को माता व पिता दोनों से प्राप्त हो। सकते हैं। इन्हें डाइण्डुिक (diandric) लिंग सहलग्न लक्षण कहा जाता है; जैसे—वर्णान्धता (colour blindness), रतौंधी (night blindness) तथा हीमोफीलिया (haemophilia)।

2. Y-सहलग्न लक्षण (Y-Linked Characters) – इसके जीन्स Y-गुणसूत्रों के असमजात खण्डों पर स्थित होते हैं। इस प्रकार सहयोगी X-गुणसूत्रों पर इनके एलील्स (alleles) नहीं पाये जाते; अतः प्रत्येक सन्तति में पिता से केवल पुत्रों तक ही जाते हैं। इन्हें होलेण्डुिक लिंग सहलग्न गुण (holandric sex linked characters) भी कहते हैं तथा इनकी वंशागति को होलैण्डूिक वंशागति (holandric inheritance) कहा जाता है। उदाहरणार्थ- कर्णपल्लवों की हाइपरट्राइकोसिस (hypertrichosis of ears)

3. XY-सहलग्न लक्षण (XY-Linked Characters) – इनके जीन्स एलील्स के रूप में X एवं Y गुणसूत्रों के समजात खण्डों पर स्थित होते हैं; अतः इनकी वंशागति पुत्रों एवं पुत्रियों में सामान्य ऑटोसोमल लक्षणों (autosomal characters) की भाँति होती है। इन्हें अपूर्ण लिंग सहलग्न लक्षण (incomplete sex linked characters) भी कहा जाता है।

लिंग-प्रभावित लक्षण
मानव के कुछ ऐसे लक्षण भी होते हैं जिनके जीन तो ऑटोसोम्स पर होते हैं, परन्तु विकास व्यक्ति के लिंग से प्रभावित होता है। दूसरे शब्दों में, पुरुष और स्त्री में जीनरूप (genotype) समान होते हुए भी दृश्यरूप (phenotype) भिन्न होता है।

मानवों में गंजापन (baldness) काफी होता है। यह विकिरण (radiation) तथा थाइरॉइड ग्रन्थि की अनियमितताओं के कारण भी हो सकता है और आनुवंशिक भी। आनुवंशिक गंजापन एक ऑटोसोमल ऐलीली जीन जोड़ी (B, b) पर निर्भर करता है। समयुग्मजी अर्थात् होमोजाइगस प्रबल जीनरूप (BB) हो तो गंजापन पुरुषों और स्त्रियों दोनों में विकसित होता है, लेकिन विषमयुग्मजी अर्थात् हिटरोजाइगस जीनरूप (Bb) होने पर यह स्त्रियों में नहीं केवल पुरुषों में विकसित होता है, क्योंकि इस जीनरूप में इसके विकास के लिए नर हॉर्मोन्स का होना आवश्यक होता है। समयुग्मजी अर्थात् होमोजाइगस सुप्त जीनरूप (bb) में गंजापन नहीं होता।

लिंग-सीमित लक्षण
ऐसे आनुवंशिक लक्षणों के जीन भी ऑटोसोम्स में होते हैं। इनकी वंशागति सामान्य मेंडेलियन पद्धति के अनुसार होती है, लेकिन इनका विकास पीढ़ी-दर-पीढ़ी केवल एक ही लिंग के सदस्यों में होता है। गाय, भैंस आदि में दुग्ध का स्रावण, भेड़ों की कुछ जातियों में केवल नर में सींगों का विकास, मानव में दाढ़ी-मूंछ आदि लक्षण ऐसे ही होते हैं।
प्रायः दो प्रकार के लिंग सहलग्न रोगों का अध्ययन भली-भाँति हुआ है तथा इनकी वंशागति इस प्रकार से होती है –

उदाहरण – (i) वर्णान्धता की वंशागति (Inheritance of Colour Blindness)-वर्णान्धता से पीड़ित व्यक्ति प्रायः लाल वे हरे रंग में अन्तर नहीं कर पाते; अत: इस रोग को लाल-हरा अन्धापन (red-green blindness) भी कहा जाता है। प्रोटॉन दोष अथवा डाल्टॉनिज्म (proton defect or daltonism) इस रोग के अन्य नाम हैं। इस रोग के कारण चित्रकार, पेण्टर, वाहन चालक आदि अत्यधिक कठिनाई का अनुभव करते हैं। इस रोग का जीन अप्रभावी (recessive) होता है तथा लिंग गुणसूत्रों में से X-गुणसूत्र पर स्थित होता है। Y-गुणसूत्र पर इसका एलील नहीं पाया जाता। एक वर्णान्ध पुरुष और एक सामान्य स्त्री की सभी सन्ताने सामान्य होती हैं, परन्तु पुत्रियों में एक X-गुणसूत्र पर पिता का वर्णान्धता का अप्रभावी जीन पहुँचता है;

अतः ये इस जीन के वाहक (carrier) का कार्य करती हैं। एक सामान्य पुरुष तथा एक वाहक स्त्री की सन्तानों में केवल लड़कों में वर्णान्धता विकसित होती है तथा एक x-गुणसूत्र पर वर्णान्धता का जीन होने पर भी लड़कियों में यह रोग नहीं होता, परन्तु ये वाहक का कार्य करती हैं। एक अन्य स्थिति में यदि एक वाहक स्त्री एक वर्णान्ध पुरुष के साथ सहवास करती है तो होने वाली सन्तानों में आधे पुत्र वर्णान्ध व आधे सामान्य होंगे तथा आधी पुत्रियाँ वर्णान्ध व आधी पुत्रियाँ वाहक होंगी। इस प्रकार निम्नांकित निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं –

  1. स्त्रियाँ तभी वर्णान्ध होती हैं, जबकि स्वर्णान्धता के जीन दोनों (XX) गुणसूत्रों पर स्थित होते हैं। क्योंकि वर्णान्धता का जीन अप्रभावी होता है और सामान्य स्थिति में X-गुणसूत्र पर इसका प्रभावी रोग को रोकने वाला जीन होता है।
  2. केवल एक ‘x’ गुणसूत्र पर वर्णान्धता का जीन स्थित होने पर स्त्री केवल वाहक का कार्य करती है।
  3. पुरुष में ‘x’ गुणसूत्र केवल एक ही होता है; अतः उस पर वर्णान्धता का जीन होने पर वह वर्णान्ध होता है।
  4. स्त्रियों में यह रोग लगभग 1-2% ही होता है।

उदाहरण – (ii) हीमोफीलिया की वंशागत (Inheritance of Haemophilia) – हीमोफीलिया (haemophilia) एक लिंग सहलग्न रोग है। इसके लक्षण ४ लिंग क्रोमोसोम में सहलग्न होते हैं और पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलते रहते हैं। हीमोफीलिया रोग प्रायः पुरुषों में होता है परन्तु स्त्रियों द्वारा पुत्रों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी पहुँचाया जाता रहता है। इस रोग के रोगी को चोट लगने पर रुधिर का थक्का नहीं बनता, रुधिर निरन्तर बहता रहता है जिससे अधिक रुधिर बहने से रोगी की मृत्यु होने की सम्भावना रहती है।

हीमोफीलिया के जीन्स रखने वाली स्त्री या वाहक (carrier) जब एक सामान्य पुरुष (normal man) से विवाह करती है तो उनकी सन्तानों में पुत्रियाँ सामान्य अथवा हीमोफीलिया की वाहक होंगी। इनमें यह रोग स्पष्ट नहीं होता क्योंकि हीमोफीलिया के जीन्स अप्रभावी होते हैं, किन्तु पुत्र (सभी पुत्र नहीं) में हीमोफीलिया रोग के लक्षण हो सकते हैं। पुत्र वाहक नहीं हो सकते हैं।

दोनों जीन्स हीमोफीलिया के होने पर स्त्री प्रायः जीवित नहीं रह सकती फिर भी उससे सम्भावित सन्तानों में लड़के सभी हीमोफीलिक होंगे किन्तु सभी लड़कियाँ वाहक होती हैं।

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